चुनावी चर्चा में सिर्फ़ दो नाम, बाकी पर जनता खामोश

नगर निगम चुनाव को लेकर जब ज़मीनी हकीकत जानने के लिए आम लोगों से बातचीत की गई, तो चर्चा एक दिलचस्प मोड़ पर दिखी। चाय की दुकानों से लेकर मोहल्लों की बैठकों तक, मतदाताओं की ज़ुबान पर बार-बार सुप्रिया महतो और फुलकी महतो के नाम ही सुनाई दिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी मैदान में कई प्रत्याशी मौजूद हैं, लेकिन जनता की नज़र में असली मुकाबला इन्हीं दो नामों के इर्द-गिर्द सिमटता दिख रहा है।
एक बुज़ुर्ग मतदाता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“बाकी लोग तो बस नाम के उम्मीदवार हैं, असली लड़ाई तो इन्हीं दोनों के बीच है।”
कुछ लोगों ने यह भी राय रखी कि कुछ प्रत्याशी चुनावी चर्चा में इसलिए सामने आए हैं ताकि समीकरण बिगाड़े जा सकें। वहीं, कुछ मतदाताओं का मानना है कि कुछ दावेदार निजी स्वार्थ के चलते मैदान में उतरे हैं, न कि जनता की सेवा के उद्देश्य से।
हालांकि, इन तमाम बातों को लेकर जनता में अलग-अलग मत हैं, लेकिन एक बात साफ़ तौर पर सामने आई है कि ज़मीनी स्तर पर लोगों की दिलचस्पी और चर्चा फिलहाल दो ही चेहरों पर टिकती नज़र आ रही है।
चुनाव नज़दीक आने के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जनधारणा मतदान के दिन किस रूप में सामने आती है।




