
पूर्वी सिंहभूम जिला, के पोटका प्रखंड,के हलुदपुखुर स्टेशन में कोयला डंपिंग क्षेत्र अब सीधे स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है. बारिश के दिनों में यार्ड से निकलने वाला कोयला सड़क पर फैल जाता है,

जिससे पूरा क्षेत्र काला कीचड़ और धूल से भर जाता है. सड़कों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक घंटों असुविधा झेलते हैं. यह केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा कर रहा है.

क्षेत्रवासी बताते हैं कि स्टेशन और कंपनी प्रबंधन की लगातार लापरवाही के कारण समस्या बढ़ती जा रही है. डंपिंग क्षेत्र के आसपास पर्याप्त निगरानी नहीं है. भारी वाहनों जैसे हाईवा और जेसीबी के लगातार संचालन से सड़कें और भी खराब हो गई हैं. प्रशासन और यार्ड प्रबंधक अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटते दिख रहे हैं. टैंकर से पानी छिड़काव करना ही समाधान मान लिया गया है, जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी हुई है. यह स्पष्ट है कि न तो स्टेशन प्रबंधन ने सुरक्षा और सफाई के पर्याप्त उपाय किए हैं और न ही कंपनी के अधिकारी आम जनता की तकलीफ को गंभीरता से ले रहे हैं.
स्थानीय निवासी यह बताते हैं कि यार्ड की वजह से कोयले की काली धूल का फैलना आम बात बन गई है. कपड़े गंदे हो जाते हैं और छत पर कपड़ा सुखाना असंभव हो गया है. लोग सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहे हैं और बुजुर्गों तथा बच्चों का स्वास्थ्य सीधे खतरे में है. प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारी की मौन भूमिका ने जनता का भरोसा पूरी तरह कमजोर कर दिया है.
सवाल यह उठता है कि आखिर यह डंपिंग क्षेत्र किसके संरक्षण में है और क्यों प्रशासन इस पर ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है. जिला परिषद सूरज मंडल ने कई बार शिकायतें भेजी लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. जनता को यह स्पष्ट संदेश मिल रहा है कि प्रबंधन केवल दिखावे के लिए काम कर रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी से भाग रहा है.
जिला पार्षद सूरज मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन, कंपनी प्रबंधक और स्टेशन प्रबंधन ने तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध जताने को मजबूर होंगे. उनका कहना है कि केवल पानी छिड़काव जैसी अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं. पानी के छिड़काव से 5 मिनट के लिए धूल बंद होती है, फिर से उड़ रही धूल से कपड़े सारे काले हो जाते हैं और आना-जाना दूभर हो गया है.
यह मामला केवल हलुदपुखुर का नहीं है, बल्कि यह जनता के अधिकार, स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है. यदि प्रशासन, कंपनी प्रबंधक और स्टेशन प्रबंधक सक्रिय नहीं हुए, तो आक्रोशित लोग कानूनी और सार्वजनिक दोनों माध्यमों से आवाज उठाने के लिए मजबूर होंगे. आम नागरिकों की जिंदगी को मुश्किल बनाने वाले इस यार्ड पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि इलाके में स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके.




