जमशेदपुर

सुष्मिता सारंगी का खुला बयान: “कुनु सारंगी का नाम राजनीति के लिए न इस्तेमाल हो”

सुष्मिता सारंगी का आधिकारिक बयान

मैं, सुष्मिता सारंगी, समस्त पूर्वी सिंहभूम के लोगों और मीडिया को सादर प्रणाम करती हूँ।

अत्यंत दुख और शर्म के साथ मुझे आज यह कहना पड़ रहा है कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे मंच पर आकर अपने स्वर्गीय पति, श्री कुनु सारंगी जी की ओर से बात करनी पड़ेगी। पर परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं कि मुझे आगे आना ही पड़ा।

1. राजनीति और परिवार का संबंध

राजनीति और हमारे सारंगी परिवार का संबंध वर्षों पुराना है। अनेक दिग्गज नेता आए, पर सभी का उपदेश हमेशा एक ही रहा – सेवा का भाव।

श्री कुनु सारंगी जी ने अपने 40 साल के राजनीतिक जीवन में हर एक पल जन कल्याण और सेवा में समर्पित किया। इसका प्रमाण है कि उन्होंने कई परिवारों को अपने अपनापन से जोड़ा।

डॉ. दिनेश सारंगी जी के छोटे भाई ने भी कई बार उन्हें और उनके सुपुत्र कुणाल सारंगी को चुनाव जीताने में पूरी मदद की।

2. परिवार पर उठती उंगलियों का खंडन

आज कई लोग उनके परिवार पर अनुचित आरोप लगा रहे हैं। मैं, श्री कुनु सारंगी जी की पत्नी होने के नाते, अपने परिवार की ओर से कुछ स्पष्ट बातें करना चाहती हूँ:

हाल ही में मेरे पति का नाम बिना वजह घसीटा गया और हमारी अनुमति के बिना उनके फोटो सार्वजनिक मंचों पर प्रकाशित किए गए।

जेएमएम के एक प्रवक्ता द्वारा यह आरोप लगाया गया कि “कुणाल सारंगी अपने चाचा से नहीं मिले” और उनके पास इसका प्रमाण है।

इसी प्रवक्ता ने यह दावा भी किया कि श्री कुनु सारंगी जी का पार्थिव शरीर कुणाल ही लाए।

मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ कि यह सब झूठ और गुमराह करने वाला प्रचार है।

3. तथ्य और प्रमाण

मेरे पति के अंतिम समय में उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें अपने बच्चों सहित गन्धनाता और जन्मभूमि गंधनाता ले जाया जाए।

मेरे दोनों बच्चों ने उनके अंतिम इच्छानुसार यह कार्य किया।

कुणाल सारंगी, जो उस समय दुबई में थे, अचानक लौटकर बंबई से बहारगोड़ा लेकर आए। इसके प्रमाण के रूप में फ्लाइट टिकट और यात्रा विवरण उपलब्ध हैं।

रांची एयरपोर्ट से बहारगोड़ा तक का सफ़र डॉ. दिनेश सारंगी जी द्वारा एम्बुलेंस द्वारा सुनिश्चित किया गया।

4. सवाल और संदेश

जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि कुणाल अपने चाचा से नहीं मिले, उन्हें मैं पूछना चाहती हूँ कि जब अंतिम संस्कार और बारह दिन की क्रियाएँ चल रही थीं, तब कुणाल हवन और अन्य कार्यक्रमों में क्यों उपस्थित थे?

पिता के प्रति किए गए कर्तव्यों का हिसाब- किताब देने की बात उचित नहीं है। कोई भी बच्चा अपने माता-पिता के प्रति किए गए कर्मों का प्रमाण नहीं देता, और यह दिखावा करना अपमानजनक है।

मेरा निवेदन है कि मृत व्यक्ति के नाम का व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल न करें।

5. स्वर्गीय श्री कुनु सारंगी का योगदान

श्री कुनु सारंगी जी ने अपने जीवन को पूरी तरह जनसेवा और राजनीति के लिए समर्पित किया। उनके योगदान और समर्पण को किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद में छोटा नहीं किया जा सकता।

6. परिवार की प्रतिबद्धता

मेरा बेटा राहुल सारंगी, जिन्होंने अपनी मल्टी-नेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए, यह किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए किया।

मेरी बेटी बिपाशा और मैं भी उनके साथ इस राह पर प्रतिबद्ध हैं।

हम तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उनके अधूरे कार्य पूरे नहीं हो जाते।

निष्कर्ष और अपील

मैं एक बार फिर संपूर्ण मीडिया, राजनीतिक दल और जनता से अनुरोध करती हूँ कि जो व्यक्ति अब इस दुनिया में नहीं है, उसके नाम का गलत इस्तेमाल न करें।

हमारा परिवार न्याय, सम्मान और मर्यादा के मार्ग पर चलता रहेगा।
श्री कुनु सारंगी जी के जीवन और उनके जनसेवा के कार्य हमेशा हमारे लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे।

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