झारखंडराज्य

माताजी आश्रम हाता में बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन

ग्रामीण संस्कृति और बहुभाषी कविताओं ने मंत्रमुग्ध किया

हाता, झारखंड: पूर्वी सिंहभूम हाता में महालया के शुभ अवसर पर 21 सितंबर 2025 को माताजी आश्रम हाता में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22वां वार्षिक उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण था बहुभाषी कवि सम्मेलन, जिसमें विभिन्न भाषाओं में कवियों ने कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया

कवि सम्मेलन अपराह्न 2 बजे शुरू हुआ, जिसमें बंगला, हिंदी, अंग्रेजी, संथाली, भूमिज और मुंडारी भाषाओं की कविताओं का आनंद लिया गया। कृष्ण कांत मंडल ने सभी कवियों का स्वागत किया

मुख्य कवियों और उनके कविता पाठ:

जयहरि सिंह मुंडा (टांग राइन, भूमिज) – कविता: सिंबि एकाब जाना

श्रीनिवास मंडल (सानग्राम, बंगला) – कविता: श्मशान यात्री

प्रवीण भवतारण मंडल (परशुडीह, हिंदी) – कविता: मोबाइल की करिश्मा

बीथिका मंडल (राखा कॉपर, बंगला) – कविता: शन्तिर खोंजे

अमल कुमार दास (खैरपाल, हिंदी) – कविता: मा बाप का प्यार

रविकांत भकत (केण्डमुरी, बंगला) – कविता: निरब शिखार गान

सुनील कुमार दे (पोटका, हिंदी) – कविता: गांव को गांव रहने दो

शंकर चंद्र गोप (नुआग्राम, हिंदी) – कविता: बैचनी क्यों

निशित कुमार दास (छोलागोड़ा, भूमिज) – कविता: सिमी बेगाहा अ बिचार

करुणामय मंडल (शंकरदा, हिंदी) – कविता: हाल ए झारखंड

इसके अलावा महेशकुदर, जानम डीह, हाता, शंकरदा और जमशेदपुर के कई कवियों ने भी बहुभाषी कविता पाठ किया, जिसमें बंगला, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में कविताओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन, संस्कृति और समाज की विविधता को उजागर किया गया

कवि सम्मेलन के अंत में राजकुमार साहू ने सभी कवियों का धन्यवाद किया और कार्यक्रम का संचालन परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप ने कियाकवि सम्मेलन के बाद त्रिलोचन विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन किया इस कवि सम्मेलन ने न केवल ग्रामीण और बहुभाषी कविताओं की महत्ता को उजागर किया बल्कि स्थानीय संस्कृति और साहित्य को भी नई पहचान दी

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