जमशेदपुर

मकर संक्रांति पर्व पर स्नान-दान का महापर्व

हजारों श्रद्धालुओं ने नदी में लगाई डुबकी, जरूरतमंदों में अन्न-वस्त्र वितरण

मकर संक्रांति पर दोमुहानी (स्वर्णरेखा और खरकई नदी का संगम) में डुबकी लगाना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है. यहां श्रद्धालु पवित्र स्नान के बाद सूर्य देव की पूजा करते हैं और अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, खिचड़ी जैसी वस्तुओं का दान करते हैं, जिससे पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि मिलती है. इसी भावना के साथ आज भी श्रद्धालुओं ने यह परंपरा का निर्वहन करते हुए जमशेदपुर के दोमुहानी घाट पर डुबकी लगाई और दान पुण्य करते हुए सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाया है.

मकर संक्रांति पर दोमुहानी में स्नान और दान का महत्व:

पवित्र स्नान: सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर यह पर्व मनाया जाता है. इस दिन स्वर्णरेखा और खरकई नदी के संगम, यानी दोमुहानी पर डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और पुण्य मिलता है. स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य मंत्रों का जाप किया जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है.

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, यह दान 10 अश्वमेध यज्ञ और 1000 गायों के दान के बराबर फल देता है.

क्या दान करें: अन्न: चावल, दाल, मूंग दाल, और खासकर तिल-गुड़ की खिचड़ी दान करना शुभ होता है.

गर्म वस्त्र: कंबल, गर्म कपड़े, जूते, और टोपी दान करने से पुण्य मिलता है.

तिल: तिल का दान शनि और चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करता है.

स्थानीय परंपरा: जमशेदपुर के दोमुहानी घाट पर मकर संक्रांति पर विशाल मेला लगता है, जहाँ लोग स्नान, पूजा और दान के बाद चूड़ा-दही और तिलकुट का आनंद भी लेते हैं. मकर संक्रांति पर दोमुहानी में स्नान और दान करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!