झारखंड की खनिज संपदा पर ग्राम सभा का हक हो: पूर्व आदित्यपुर मेयर (महापौर ) प्रत्याशी रविंद्र बास्के

आदित्यपुर: झारखंड की खनिज संपदा को लेकर एक बार फिर सियासत और सामाजिक विमर्श तेज होता दिख रहा है। पूर्व आदित्यपुर मेयर महापौर प्रत्याशी रविंद्र बास्के ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि राज्य की जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार यहां के आदिवासी और मूलवासी समाज का है, और खनिज संपदा से होने वाली आय का सीधा लाभ ग्राम सभाओं तक पहुंचना चाहिए।
रविंद्र बास्के ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा से है। यहां के जंगल, नदियां और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और जीवन का आधार हैं। सदियों से आदिवासी समाज ने इन संसाधनों की रक्षा की है और इसके लिए कई संघर्ष भी किए हैं।
उन्होंने कहा कि आज झारखंड से कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज बड़े पैमाने पर निकाले जा रहे हैं और इन्हें विभिन्न उद्योगों एवं कंपनियों को बेचा जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।
बास्के ने आरोप लगाया कि खनन कार्यों के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं, उनकी जमीन चली गई है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और स्थायी रोजगार नहीं मिल पाया है। कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, जबकि उन्हीं गांवों की जमीन के नीचे से अरबों रुपये के खनिज निकाले जा चुके हैं।
उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व को केवल सरकारी खजाने में सीमित रखने के बजाय, उसका एक बड़ा हिस्सा सीधे ग्राम सभाओं के खातों में जमा किया जाए। इससे गांव स्तर पर विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सकेगा।
रविंद्र बास्के ने कहा, “जब जमीन हमारी है, जंगल हमारा है और इस संपदा की रक्षा के लिए संघर्ष भी हमने किया है, तो इसके लाभ पर पहला अधिकार भी हमारा होना चाहिए। ग्राम सभा को सशक्त किए बिना झारखंड का वास्तविक विकास संभव नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और कानूनों में ग्राम सभा को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन अधिकारों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वह ग्राम सभा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ठोस नीति बनाए और उसे लागू करे।




